आईना ए गुलशन


शफ़्क़त है मुहब्बत है आईना ए गुलशन में।
अल्लाह की रहमत है आईना ए गुलशन में।।
شفقت  ھےمحبت ھے آئینۂ گلشن میں
اللّٰہ کی  رحمت  ھے  آںٔینۂ گلشن میں
मज़मून निराले हैं पढ़ कर तो ज़रा देखो।
जिद्दत है रवायत है आईना ए गुलशन में।।
مضمون نیرا لے ہیں پڑھ کر تو ذرا دیکھو
جدت ھے روایت ھے آںٔینۂ  گلشن میں
मजमूआ  हमारा है  जो जान से  प्यारा है।
दुनिया की हक़ीक़त है आईना ए गुलशन में।।
مجموعہ ہمارا ھے  جو جان سے پیارا ھے
دنیا  کی  حقیقت  ھے  آئینۂ  گلشن میں
ये हम ही नहीं कहते  कुछ लोग भी कहते हैं।
सब उनकी इनायत है आईना ए गुलशन में।।
یہ ہم ہی نہیں کہتے کچھ لوگ بھی کہتے ہیں
  سب  ان  کی  عنایت  ھے   آںٔینۂ  گلشن  میں
अश्आर हमारे जो महफ़िल में पढ़े गुलशन।
कहने  को कयामत है आईना ए गुलशन में।।
اشعار ہمارے جو  محفل میں پڑھے گلشن
سب ان کی کرامت ھے آںٔینۂ   گلشن  میں
گلشن خیرآبادی

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