जबीं पे धूल जम गई तो आदमी भी क्या करे।


जबीं पे धूल जम गई तो आदमी भी क्या करे।
कोई तो साफ दिल करे कोई तो आईना करे।।

ये आदमी की सोच है  वो चाहे जो ख़ता करे।
जफ़ा करे सितम करे न जाने और क्या करे।।

हमीं नहीं  हैं  मुन्तज़िर  सभी  हैं  इन्तज़ार में।
न जाने कब वो आएगी ख़ुशी खुदा भला करे।।

ये   इश्क़  ऐसी चीज़ है  जहाँ   में   मेरे    दोस्तो।
किसी पे दिल जो आ गया परी मिले तो क्या करे।।

मैं  ख़ुश हूँ  तूने ज़िन्दगी में गम़ मुझे अता किए।
तेरा भी दिल हो  शादमा  दुआ है ये  खुदा  करे।।

वो उठ तो जाएगा कभी बुलंदियों से गिर के भी।
मगर जो गिर गया नज़र से आदमी  वो क्या करे।।

जो राहे हक़ पे चल के फिर भटक गया है दोस्तो।
वो शफ़क़तें  करे मगर  नमाज़ ए हक़ अदा करे।।

जो  बंद कर  दिये  गए  हों  ज़िन्दगी  के  रास्ते।
वो  आदमी  भी  क्या  करे  दुआ करें दवा करे।।

ये  मेरा  मशवरा है दोस्त गुलशन ए जहान में ।
वफ़ा  उसी  से कीजिए जो आप से वफ़ा करे।।

गुलशन खै़राबादी

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