अंजुमन ए मोहम्मद ए रसूल खै़राबाद का मुशायरा

अंजुमने मुहम्मद ए रसूल के तहत नातिया मुशायरा खै़राबाद सीतापुर
बज़्म-ए-गुलशन उर्दू अदब खै़राबाद की जानिब से  एक नातिया मुशायरा  मिर्जा इक़रार हुसैन इक़रार खै़राबादी के तत्वावधान में मोहल्ला बजदारी टोला खै़राबाद में एक अपरंपरागत मुशायरे का आयोजन किया गया।
जिसमें मसूद महमूदाबादी ने पवित्र कुरान के पाठ से  शुरू किया ।
  इसकी अध्यक्षता साजिद खै़राबादी ने की और इसका निर्देशन मजाज़ सुल्तानपुरी ने  अंजाम दिया। सैय्यद ज़िया अल्वी विशिष्ट अतिथि रहे।
मुशायरा में पसंदीदा कवियों के अशआर पाठकों को समर्पित हैं।

मेरे हाले परीशां पर हो ऐहसां या रसूल अल्लाह। मदीने जाने का हो जाए सामां या रसूल अल्लाह।। साजिद खै़राबादी

जो बिना ए इश्क़ पहुंच गई सरे अर्श ज़ाते मोहम्मदी। तो जुबाने ख़ल्क़ ये कह उठी बलग़लउलाबेकमालिही।
सैय्यद ज़िया अल्वी

मरहबा सद मरहबा निस्बत रसूल अल्लाह की।
पहले जन्नत पाएगी उम्मत रसूल अल्लाह की।। अशफ़ाक़ अली गुलशन खै़राबादी

तसव्वुर     में     मदीना     आ रहा है।
मजाज़ जब मुझको जीना आ रहा है।।
रसूल  अल्लाह  की  तारीफ़  लिखते।
क़लम  को  भी  पसीना  आ रहा है।।
मजाज़ सुल्तानपुरी

बरकतों  के  ख़ज़ाने  निकलने   लगे।
सैय्यादा बी के घर आप क्या आ गए।।
क़ारी आज़म जहांगीराबादी

नबी  के  उम्मती  होने  का  हासिल है सरफ़ मुझको।
भरा खुशियों से सीना है मुझे दुनिया से क्या मतलब।।
मसऊद महमूदाबादी

जो रसूले खुदा पर फ़िदा हो गया ।
उस बशर का बड़ा मर्तबा हो गया।।
विवेक मिश्र राज़ खै़राबादी

सद  मरहबा ये रहमते आलम की शान है।
ज़ेरे  क़दम  ज़मीं  तो  ज़मीं  आसमान है।।
महबूब खै़राबादी

रश्के  बहिश्त  ये  मेरी  कुटिया  हुई  है  आज।
ज़िक्रे रसूले पाक की महफिल सजी है आज।।
इक़रार खै़राबादी

इनके अलावा जावेद यूसुफ़, अख़्तर मुजीबी , अफ़ज़ल यूसुफ़ , राजेंद्र  रंचक ,इसरार खै़राबादी, दिलीप कुमार दिल बाराबंकवी, शफ़ाअत खै़राबादी, और रईस रहमानी वगैरह ने अपने कलाम पेश किए।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *