बज़्में ग़ज़ल की शेरी नशिस्त, उर्दू शायरी

Urdu Shayari

बज़में ग़ज़ल उर्दू सोसाइटी खै़राबाद का महाना तरही प्रोग्राम खै़राबाद सीतापुर
बज़्में ग़ज़ल उर्दू सोसाइटी खै़राबाद के तहत एक तरही शेरी नशिस्त का एहतमाम बज़्म के सदर सईदुल हसन खां गुहर खै़राबादी के मकान पर उन्हीं के जे़र ए एहतमाम किया गया।
जिस की सदारत बज़्म के सदर डॉक्टर अज़ीज़ खै़राबादी ने की और निजामत के फराइज मौलाना अतहर कमलापुरी ने अंजाम दिये  ।

Urdu Shayari & Gazal


नशिस्त का आगाज़ नात ए पाक से हुआ ।
इस के बाद तरही दौर शुरू हुआ। इस नशिस्त में जिन शोरा ए इकराम ने हिस्सा लिया उन के मुन्तख़ब अशआर नजर ए कारईन हैं।
जब  तवकुल  पे   क़नाअत  है   तुझे   राहों   में।
क्या ज़रूरी है कि फिर रख़्त ए सफ़र साथ रहे।।
डॉ अज़ीज़ खै़राबादी
मुझको ग़मगीन जो देखा तो हुआ ये अक्सर।
शाम से नज्म ओ क़मर ता बा सहर साथ रहे।।
साग़र वारसी शाहजहांपुरी
सख़्त   घड़ियां  भी  गुज़र  जायेंगी आसानी से।
जु़ल्मत ए शब में जो उम्मीद ए सहर साथ रहे।।
गुहर खै़राबादी
आदमीयत को मिले जिससे ज़माने में फ़रोग़।
ऐ  खुदा  तेरे  करम  से  वो  हुनर साथ रहे।।
रेहाना आतिफ़ खै़राबादी
शौक़  काफ़ी  नहीं  मंजिल  पे  पहुंचने  के लिए।
ये भी लाज़िम है मियां जौक़ ए सफ़र साथ रहे।।
मास्टर निसार खै़राबादी
आपकी याद अगर शाम ओ सहर साथ रहे ।
शेर गौई  का मिला है   जो   हुनर साथ रहे।।
मजाज़ सुल्तानपुरी
आरज़ू  है  यही  हर  एक  बशर  साथ रहे।
हिंदू-मुस्लिम ही नहीं सारा नगर साथ रहे।।
गुलशन खै़राबादी
तीरगी जहल की पहनेगी उजालों का लिबास ।
इल्म के फ़न के अगर शम्स ओ क़मर साथ रहे।।
कारी आज़म जहांगीराबादी
ताब  ए  दीदार  रहे  या  न  रहे  आंखों में।
देखने वालो मगर हुस्न ए नज़र साथ रहे।।
मौलाना अतहर कमलापुरी
ये क़दम बढ़ते रहें जानिब ए  मक़सद पैहम।
मंजिलें  दूर  सही अज़्म ए सफ़र साथ रहे ।।
महबूब खै़राबादी
रह के फ़ुर्क़त में‌ भी ख़ाली न रहा दामन ए दिल।
हर  नफ़स  आप की  यादों  के  गुहर साथ रहे।।
विवेक मिश्रा राज़ खै़राबादी
मुत्मइन तुम भी रहो हम भी रहें गुलशन में।
भाईचारे का भरम अपने अगर साथ रहे।।
हाफ़िज़ मसूद महमूदाबादी
कौन चाहेगा भला अबर ए शियाह फाम यहां।
मौसम ए खुश्क में जब गेसू ए तर साथ रहे।।

अफ़ज़ल युसूफ खै़राबादी
इनके अलावा दिलीप कुमार दिल बाराबंकवी, राजेंद्र प्रसाद रंचक खै़राबादी, रहबर खैराबादी ,अख्तर मुजीबी, रईस रहमानी, और सफ़ाअत  खै़राबादी वगैरह ने भी अपना कलाम पेश किया।
इस प्रोग्राम में काफ़ी तादाद में सामईन ने भी शिरकत फरमाई । खुशूसन मदार ग़ालिब उरफ़ असद सिद्दीकी, फै़जुल हसन फै़जी़ , मास्टर जलीस बैग, नजमुल हसन,  मेराजउल हसन,  महमूद उल हसन वगैरा मौजूद रहे।
आख़िर में बज़्म  के सेक्रेटरी हाफ़िज़ मसूद महमूदाबादी ने सभी का शुक्रिया अदा करते हुए नशिस्त के एख़त्ताम का ऐलान  किया।

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