बज़्में गुलशन अदबी तंजी़म खै़राबाद का मुशायरा Urdu Hindi Shayari    

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बज़्में गुलशन अदबी तंजी़म खै़राबाद
खै़राबाद सीतापुर बज़्में गुलशन अदबी तंजी़म की जानिब से एक गैर तरही शेरी नशिस्त  का इन्काद अशफ़ाक अली गुलशन खै़राबादी के मकान पर हुआ।
जिसकी सदारत डॉक्टर अज़ीज़ खै़राबादी  और निजा़मत के फ़राइज मजाज़ सुल्तानपुरी ने अंजाम दिए।
नशिस्त का आगाज़ नाते पाक से हुआ।
इस मौके पर जिन शोरा ए इकराम ने कलाम पेश किया उनके मुन्तख़ब अशआर  नजर ए कारईन हैं।
उसका  वजूद  ऐसा निगाहों में बस गया।
मैं खुद को देखने के लिए भी तरस गया।।
डॉक्टर अज़ीज़ खै़राबादी


इक ग़म ए यार ही था मोनिस ओ ग़म ख़्वार मेरा।
वो  भी  अब  रूठ  गया  मेरे  मुक़द्दर  की  तरह।।
निसार अहमद निसार खै़राबादी
ऐसा  नहीं  किसी  से  मोहब्बत  नहीं मुझे।
हर दर पे सर झुकाने की आदत नहीं मुझे।।
ज़ियाउद्दीन ज़िया खै़राबादी
हिमाक़त है तेरा उस पार जाना।
अभी दरिया में तुग़यानी बहुत है।।
मजाज़ सुल्तानपुरी


मेहरबां अब्र हुआ जाम बकफ़ साकी भी।
ऐसे आलम में कोई खेल है तौबा करना।।
नफ़ीस खै़राबादी पानीपत
हौसलों का चराग़ बुझ न सका।
सरकशी  तो बहुत हवा ने की।।
कारी आज़म जहांगीराबादी


उंगलियां  न  उठ जाएं  तार तार दामन पर।
शायद इस लिए ‘गुलशन’ बेखुदी से डरते हैं।।
अशफ़ाक अली गुलशन खै़राबादी
मुझको रोका मेरे मसाइल ने।
आरज़ू चांद पर थी जाने की।।
हाफ़िज़ मसूद महमूदाबादी


वफ़ा की राह में है वक्फ़ ज़िन्दगी जिस की।
कहां वो दर्द ओ अलम का हिसाब रखते हैं।।
महबूब खै़राबादी


रह के फ़ुर्क़त में‌ भी ख़ाली न रहा दामन ए दिल।
हर  नफ़स  आप की  यादों  के  गुहर साथ रहे।।
विवेक मिश्रा राज़ खै़राबादी


ज़रूरी है क़मर कि संग खा कर शीशा ए दिल पर।
मुकम्मल  इश्क़  में  दीवाना  दीवाना सा हो जाए।।
क़मर खै़राबादी


शोर ए महशर जिस को सुन्ना है वो आए मेरे घर।
हर  पड़ोसी  देखता  है  रोज़  दंगल  हाय  हाय।।
घायल खै़राबादी


उस का दामन पकड़ के मैंने कहा।
मुझको  देखो  सुनो  ज़रा  ठहरो।।
इक़रार हुसैन इक़रार खै़राबादी


तुझको देखा करें सदा यूं ही।
आरज़ू  बस  यही  हमारी है।।
शफ़ाअत खै़राबादी


अगर गुलशन में आ जाओ तो फिर दीदार हो जाए।
मुहब्बत  का  मेरी  पहले  ज़रा  इज़हार  हो  जाए।।
रईस रहमानी खै़राबादी


गुलसितां से खुशनुमां मंज़र गए।
दिल नवाज़ी के सभी पैकर गए।।
रहबर खै़राबादी


इनके अलावा राजेंद्र प्रसाद रंचक खै़राबादी ,अख्तर मुजीबी खै़राबादी, वसीम खै़राबादी, दिलीप कुमार दिल बाराबंकवी, वसी खै़राबादी, वगैरह ने भी अपना कलाम पेश किया साम ईन ने दाद ओ तहसीन से नवाजा़ और
गुलशन खै़राबादी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

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