शायरी

दिन तो होता है मगर रात नहीं होती है Urdu shayari

“दिन तो होता है मगर रात नहीं होती है “5ग़ज़लेंं ज़िक्र  होता  है  मगर बात नहीं होती है।आज कल उनसे मुलाकात नहीं होती है।। वो  तवज्जो  वो  मदारात   नहीं  होती है।मुफलिसों के लिए हक़ बात नहीं होती है।। वो जगह आज भी आलम में यक़ीनन है जहां।“दिन तो होता है मगर रात नहीं होती है”।। सोचता …

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एक नेकी तो कमा लूं मैं भी। Ek neki to Kama Lun main bhi

“एक नेकी तो कमा लूं मैं भी” कोई  रोता  है  हंसा लूं मैं भी।“एक नेकी तो कमा लूं मैं भी”।। दिल की ये बात न टालूं मैं भी।आपको दिल में बसा लूं मैं भी।। ऐ खुदा तू दे मुझे रिज़्क़े हलाल।एक  भूखे को खिला लूं मैं भी।। दे इजाज़त ये मुझे वक़्त  अगर।उनको पलकों पे …

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ज़िन्दगी फिर भी सबको प्यारी है। Jindagi fir bhi sabko pyari hai

आईना ए गुलशन 15=18  गुलशन ख़ैराबादीडॉ अज़ीज़ खै़राबादी ..        “आईना ए गुलशन पर एक तायराना नज़र”खै़राबाद अवध  एक मर्दन खे़ज़ ख़ित्ता रहा है । हर दौर में यहां बेमिसाल हस्तियां नमूदार होती रही हैं जो न सिर्फ़ मुलकी  सतह पर बल्कि तमाम आलम में अपने नाम रोशन कर चुकी हैं। ये क़स्बा इल्म ओ अदब  …

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बढ़ते हुए क़दम भी हैं कुछ डगमगा रहे। Badhte hue kadam bhi hain kuchh Dagmaga rahe

आईना ए गुलशन 11 गुलशन ख़ैराबादी                        अपनी बातमेरा नाम अशफ़ाक अली है तख़ल्लुस की जगह गुलशन खै़राबादी इस्तेमाल करता हूं।मेरी पैदाइश 9 अक्टूबर 1964 ईस्वी को मुजाहिद ए आज़ादी अल्लामा फ़ज़ले हक़ खै़राबादी के मोहल्ला शेख़ सराय खै़राबाद अवध में हुई वालीदैन ने बड़े नाज़ से मेरी परवरिश की और मेरी तालीम के लिए मेरा …

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ऐसा हिंदुस्तान बना दे या अल्लाह। Aisa Hindustan Bana de ya Allah

    क़ता तारीख़ तसनीफ़                     “आईना ए गुलशन”                मुसन्निफ़ गुलशन ख़ैराबादी                       नतीज़ा  ए  फ़िक्र             मुफ़्ती इलियास ‘ताइब’ ख़ैराबादी इदराक  के   साए  में  एहसास  के  आंगन  में।जज़्बात ए मोहब्बत हैं अल्फ़ाज़  के दामन में।।इस  तरह  इशाअत  की तारीख़ लिखो ‘ताइब’।है रक़्से ए ग़ज़ल अच्छा आईना ए गुलशन में।।                         2018 ईस्वी     आईना ए गुलशन 24 गुलशन ख़ैराबादी …

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हम चुका सकते नहीं क़ीमत तेरे एहसान की ham chuka sakte nahin kemat tere ahsaan ki

अपनी  अपनी फ़िक्र में  बेदार हैं।हम सभी इस दौर के फ़न्कार हैं।। क्यों न हो सब पर इनायत की नज़र।रहमत ए  कुल  जब  मेरे सरकार हैं।। क्या  गुलों से उड़ गई  सारी महक।तितलियां क्यों आजकल बेज़ार हैं।। ख़ुश नज़र आए यहां कोई तो क्यों।सब  के  शानों पर  ग़मों  के बार हैं।। फ़र्ज़ है कोई अमल …

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लाख सज़्दे किया करे कोई। Lakh Sajde Kiya Kare koi

कोई अपना हो ये ख़्वाहिश बहुत है।हमारे   दिल  में   गुंजाइश  बहुत है।। सुना  है  आदमी  पत्थर  हुआ  है।पस ए पर्दा यही साज़िश बहुत है।। खन्डर  होने लगे कच्चे  मकां  सब।कि सैल ए आब है बारिश बहुत है।। ग़रीबी  में  कोई  रिश्ता  हो  कैसे।नए लोगों की फ़रमाइश बहुत है।। न  क्यों  तालीम  दूं  बेटी  को अपनी।मोअल्लिम …

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गुलशन मैं अपना हाथ बढ़ा दूं नहीं नहीं। Gulshan main apna hath badha dun nahin nahin

सहारे दोनों को हासिल हैं ज़िन्दगी के लिए।वो है किसी के लिए और मैं किसी के लिए।। मुझे  तू  फूल  दे  या  ख़ार  दे  तेरी मर्ज़ी।मैं आ गया हूं तेरे दर पे हाज़िरी के लिए।। दिखा रहे थे जो औरों को बरहमी की अदा।तड़प  रहे  हैं  वही  लोग  दोस्ती  के लिए।। करेगा चाक अभी ज़ुल्मतों …

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ख़त्म हो जाता है जीने का तमाशा कैसे khatm Ho jata hai jeene ka Tamasha kaise

ज़माने  के  मुताबिक़   ढ़ल  रहा हूं।मैं अपनी रह गुज़र पर चल रहा हूं।। न  पूछो  मुझसे वो दौर ए तबाही।जहां बीता हुआ इक पल रहा हूं।। जो खोया है उसे पाना है मुश्क़िल।अबस हाथों को अपने मल रहा हूं।। मुझे   बूढ़ा   कहेंगे   मेरे   बच्चे।मैं जिन के वास्ते पागल रहा हूं।। नई तहजी़ब का मुझपर असर …

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बेताब जिसे दिल में बिठाने के लिए था Betaab jise Dil mein bhi Thane ke liye tha

दिल पे जो नक़्श  हैं ज़माने से। कब मिटे  वो कभी मिटाने से।। कितना जां बख़्श था वो मंज़र भी।भूलता   ही    नहीं    भुलाने    से।। आज हासिल हुआ सुकूं दिल को।इक  तेरे  दर  पे  सर  झुकाने  से।। आख़िरस मिल गया मुझे साहिल।उनकी  आंखों  में  डूब  जाने  से।। होगी इस्लाह क़ौमो मिल्लत की।सोए  ज़हनों को  अब जगाने से।। …

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