gulshan khairabadi

अशफाक अली तकल्लुफ गुलशन खैराबादी l मैं जिला सीतापुर से 10 किलोमीटर दूर पूरब और लखनऊ से 82 किलोमीटर दूर पश्चिम में कसबा खैराबाद अवध में 9 अक्टूबर 1964 को महिला एक सराय खैराबाद में मरहूम शाकिर अली साहब के घर में पैदा हुआ 

Books - Aaina-e-Gulshan

aaina e gulshan

गुलशने ग़ज़ल... हम्द.

دعا پیش خدمت ھے  दुआ ग़ज़ले

میرے  مولا  تو  یہ کرم کر دے

صحنِ گلشن میں تازگی بھردے

मेरे   मौला तू  ये  करम  कर दे ।

सहने गुलशन में ताज़गी भर दे  ।।

میں  بھی  اُڑتا  پھروں بلندی پر

حوصلوں کا مجھے وہ شہپر دے

मैं भी उड़ता फिरुँ बलन्दी पर ।

हौसलों का मुझे वो शहपर दे  ।।

میں جلاؤں گا حق کی راہوں میں

تو چراغوں  میں  روشنی بھر دے

मैं  जलाऊँगा   हक़  की राहों में  ।

तू चराग़ों   में  रौशनी   भर दे  ।।

میر و غالب کا درد دے مجھ کو

میری  غزلوں  کو  معتبر کر دے

मीरो  ग़ालिब   का दर्द दे मुझको   ।

मेरी   ग़ज़लों को  मोतबर  कर दे  ।।

بیٹیاں پڑھ کی سب کی عالم ہوں

اے خدا روشنی یہ گھر گھر دے

बेटियाँ पढ़ के सब की आलिम हों ।

ऐ   खुदा  रौशनी   ये  घर  घर  दे  ।।

جس میں نایاب ہوں سبھی گوہر

فکر کا وہ مجھے سمندر دے

जिसका नायाब हो हर इक गौहर।

फिक्र  का  वो  मुझे  समंदर  दे।।

اے خدا ان کے غم مجھے دیکھ کر

ان کے دامن میں ہر خوشی بھر دے

ऐ खुदा उनके ग़म   मुझे दे कर  ।

उनके दामन में हर खुशी भर दे ।।

آج اردو پڑھیں سبھی گلشن

ایسی توفیق تو عطا کر دیں

आज उर्दू पढ़ें सभी ,गुलशन , ।

ऐसी तौफ़ीक़ तू अता कर दे।।